FAQ     |    About us   |   Channels   |   Feedback 

  GREHSAHELI  

HOME                 PRODUCTS                 SERVICES                 RESELLER                 PROMOTION                 CONTACT

     
   स्वास्थ्य
   सर्दियों में नवजात शिशु की देखभाल
 

सर्दियों का आगमन काफी सुहावना होता है। पर इसका असली मजा तभी है,जब आप और आपका पूरा परिवार स्वस्थ रहते हुये इन खुशियों का मजा उठा सकें । खासतौर से यदि धर में छोटा बच्चा है,तो सर्दियों में उसका खासतौर पर ध्यान देने की जरूरत होती है। अचानक मौसम में बदलाव आने से छोटे बच्चे मौसमी बिमारियों की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। एैसे में एक मां के लिये सर्दियों के शुरूआती दिनों में बच्चों की देखरेख करने की जिम्मेदारी बढ जाती है।

   
 

शिशु के अच्छे स्वास्थ्य के लिये जरूरी है,उसकी उचित देखभाल। छोटे बच्चों को ठंड से बचाने के लिये उन्हें गरम कपडे पहनाकर रखें। नवजात शिाशाु के लिये मां के शारीर की गरमी काफी अच्छी रहती है, इसलिये उसे अपने पास रखें। बच्चे की त्वचा काफी कोमल व संवेदनशील होती है, अगर बच्चे को गरम बोतल से सेंक देनी पडी तो ध्यान रखें कि पानी बहुत अधिक गरम न हो और बोतल अच्छी तरह से कपडे में लिपटी हो।

 बेडरूमः

सोने वाले कमरे का तापमान मौसम के अनुसार रखें। बच्चे के कमरे को अधिक ठंड के दिनों में कुछ देर तक अंगीठी या हीटर जलाकर गर्म किया जा सकता है। पर ध्यान रहे,बच्चें को सुलाने से पहले हीटर या अंगीठी जरूर बुझा दें। साथ ही सर्दी के दिनों में भी कमरे को पूरी तरह बंद न करें। कमरे के रोशनदान, खिडकी या दरवाजे को पूरा बंद न करके उसे थोडा सा खुला रखें ताकि कमरे में फ्रेश हवा की आवाजाही बनी रहे। बच्चे का बिस्तर खिडकी या दरवाजे के ठीक सामने न लगाएं। सोते समय बच्चों को बहुत पतले या बिना कपडों के न सुलाएं ताकि रात में अगर ओढा हुआ कपडा हट भी जाए,तो बच्चे का ठंड से बचाव हो सके।
बच्चे का बिस्तरः बच्चे का बिस्तर आरामदेह होने के साथ साथ मौसम के अनुकूल होना चाहिए। सर्दियों में चादर,कंबल आदि की व्यवस्था ठीक होनी चाहिए। नवजात शिशाु के बिस्तर पर प्लास्टिक कवर बिछाने के बाद उस पर नमी सोखने वाले कपडे की चादर बिछाएं। ओढाने के लिये भी कबंल या रजाई के नीचे सूती चादर का इस्तेमाल करें।
मालिशा व स्नानः- बच्चे को नहलाना भी एक कला है। शिशु को नहलाने से पहले तेल या धरेलू उबटन से उनकी मालिश करें। मालिश के बाद उसे थोडी धूप मे रखें।
इससे उसे विटामिन डी भी मिलेगा।पर ध्यान रखें कि धूप सीधा बच्चे की आंखोंपर न पडे। मालिश करने के लगभग 45 मिनट बाद बच्चे को हल्के तेज गर्म पानी में नहलाएं। सर्दियों में शिशु को बहुत सुबह नहलाने की जगह दिन चढ जाने पर नहलाएं।बच्चे को ज्यादा देर पानी या बिना कपडों के खुला न छोडे।उन्हें सर्दी भी लग सकती है। इसलिए खुले में बच्चे को न नहलाएं।
कपडेः- कपडे तो सभी मौसम के अनुकूल ही पहनते है,पर बच्चें के लिए दूसरे लोगो की तुलना मे पहले ही बदल जाता है। नाजुक और कोमल होने की वजह से उन पर ठंड जल्दी असर हो जाता है।
बच्चें को सिर्फ एक गरम कपडा पहनाने की बजाए परत दर परत यानि इनर, वार्मर या हाफ बाजू का स्वेटर जरूर पहनाएं। सर्दियों में इस बात का खास ध्यान रखें कि उसका सिर,कान और पैर हमेशा ढंका रहे। खासतौर पर बाहर जाते समय बच्चें को टोपी ओर जुराबे जरूर पहनाएं।
आहारः- बच्चें के विकास में उनके आहार का विशेष महत्व होता है। पर बदलते मौसम के साथ बच्चे के खाने संबधी आदतों में भी बदलाव की जरूरत होती है। सर्दियों में बच्चें को ठंडी या खटटी चीजों से दूर रखें। ध्यान रखें कि ठंडी का मतलब सिर्फ फ्रिज मे रखी वस्तुएं नही है, बल्कि ठंडी तासीर वाली चीजों को भी उनकी डाइट में शामिल न करें। । सर्दियों में बच्चें की डाइट में सामान्य खाने के अलावा आलू, अंडा, ड्राई फ्रूटस आदि की मात्रा ज्यादा रखें। ठंड के मौसम में अक्सर बच्चे पानी पीने में आनाकानी करते है। शरीर में पानी की कमी होने पर डिहाइडे्रशन की शिकायत हो सकती है। इसलिए बच्चे को किसी न किसी तरीके से पानी जरूर पिलाते रहें। वैसे तो मां के दूध में से ही शिशु को जरूरत भर पानी मिल जाता है, पर फिर भी बच्चे को प्यासा न रखें।
इसके लिए उबालकर ठंडा किया हुआ पानी बीच बीच में देते रहें।
ध्यान रखें:- नियमित अंतराल पर बच्चों के हाथ गुनगुने पानी से साफ करें। हाथ व आसपास की सफाई कई प्रकार के वायरस से दूर रहने का प्रभावी तरीका है।
यदि किसी को द्घर में जुकाम है,तो कोशिश करें कि बच्चों को उनसे दूर रखें। इसके अलावा बच्चों के लिये नियमित व्यायाम और भरपूर नींद बहुत जरूरी है।
जहां तक संभव हो जमीन व फर्श को कवर करके रखें, ताकि बच्चा यदि नंगें पैर भी चल रहा है, तो ठंड से बचाव हो।
बच्चों को दोपहर में थोडी देर धूप में अवश्य खेलने दें। इससे बच्चे का पूरा बाडी वर्कआउट हो जाता है। खासतौर पर सुबह और शाम के समय बच्चे के कान व सिर को कवर करके रखें।
यदि बच्चा किसी डे केयर सेंटर मे रहता है, वहां भी बच्चे की साफ सफाई का ध्यान रखें। यदि संभव हो तो बच्चे को आंख व नाक को छूते या रगडते समय कपडे व टिश्यू का इस्तेमाल करना सिखाएं।
बच्चे के खान पान का ध्यान रखें। हेल्दीफूड के साथ मोसमी फल व सबिजयां खाने को दें। गर्म दूध, खचडी व दलिया देना भी हेल्दी रहता है।

 
 

 

 

     
     
 
 
 

About us    |    Channels    |    Product    |    Advertise with us    |    Privecy & Policy    |    Services