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   स्वास्थ्य
   पथरी का दर्द बाप-रे-बाप
 

जिन लोगों ने अपने कई तरह के दर्द देखे और उन्हीं में से किसी को पथरी का दर्द भी हुआ तो वे पथरी के दर्द के बारे में शायद यही कहेंगे, 'बाप रे बाप।' पथरी का दर्द जब उठता है तो सामान्य दर्द निवारक दवाईयां बिल्कुल बेअसर साबित होती हैं।
पथरी का मर्ज ईसा से करीब 5000 वर्ष पूर्व से ज्ञात है। ईसापूर्व 4800 में दफनाई गयी ममियों में भी पथरी पाई गयी है। करीब 5000 वर्ष पूर्व के मिस्र के चिकित्सकीय लेखन, यूनानी चिकित्सकीय लेखन, ऋग्वेद अथर्ववेद और सुश्रुत संहिता में भी पथरी रोग का जिक्र है।

   
 

  मध्ययुग में पथरी शल्य क्रिया द्वारा निकाली जाती थी। आपरेशन बड़ा दर्दनाक होता था। 'शल्य चिकित्सक' फेरी लगाते थे। 4-6 लोगों की टीम होती थी। उन्होंने किसी सार्वजनिक स्थान पर मजमा लगाया और इलाके में डुगडुगी पिटवा दी कि पथरी निकलवा लो।

पथरी से परेशान लोग इनके पास आते, तब यह खुले में मेज पर लिटाकर नशीला पेय पिलाकर रोगी का आपरेशन करते और अपनी फीस लेकर चल देते। किसी तरह की सुरक्षा के उपाय करना तब प्रचलित नहीं था, न शल्यक्रिया के लिए कोई प्रशिक्षण, नियमन या लाइसेंसिंग प्रक्रिया ही अस्तित्व में थी। इस कारण बहुत से मरीज मर जाते थे लेकिन मूत्राश्य की पथरी से परेशान लोग आपरेशन कराने का जोखिम एक उम्मीद में मोल लेते थे।
हमारे मूत्र में यूरिया, क्रिएटनीन, एसिड यूरिक, कैल्शियम, मैग्नीशियम और अमोनिया आदि लवण विद्यमान रहते हैं। यूं तो यह द्घोल रूप में होते हैं किंतु जब इनकी मात्राा बढ़ जाती है तो इनके कणों से क्रिस्टल बनने लगते हैं। फिर इन पर नये कणों की परत चढ़ती रहती है। ऑक्सलेट वाले पदार्थों का अधिक सेवन, विटामिन डी, अधिक जलीय खाद्य खाने, कम पानी पीने, शरीर से अधिक पानी पसीने के रूप में निकलने, गुर्दे में इन्फेकशन, कहीं भी मूत्र के सामान्य प्रवाह में बाधा, हाइपरपैराथायरोडिज्म अथवा गाउट रोग होने, लंबे समय तक बीमारी की हालत में बिस्तर पर पड़े रहने जैसे तमाम कारण पथरी के उद्भव और विकास की वजहें हो सकती हैं।
सामान्यतः गुर्दे की पथरी वालों को पीठ से पेट की ओर दर्द आता अनुभव होता है। मूत्र नली की पथरी होने पर पीठ की निचली ओर से जांद्घों की ओर दर्द का अहसास होता है। इसके अतिरिक्त दोनों ही तरह की पथरियों में मूत्र के साथ एक दो बूंद खून आना, बुखार का आभास और मूत्र त्यागते समय जलन की समस्या भी सामने आ सकती है। प्रोस्टेट बढ़ जाने से भी पथरी की समस्या पैदा हो सकती है। पहले यह माना जाता था कि पथरी बड़ों (30 से 60 वर्ष की उम्र तक) को ही होती है किंतु अब यह रोग 5 वर्ष से बड़े बच्चों में भी देखने में आ रहा है।
पेट के रंगीन एक्स-रे अथवा अल्ट्रासाउंड से यह स्पष्ट हो जाता है कि पथरी कहां है और कितनी बड़ी है। कुछ हद तक पथरी होने न होने का पता मूत्र जांच से भी पता लग जाता है, इसलिए आमतौर पर डॉक्टर पहले पेशाब की जांच कराते हैं। पेशाब की जांच में जिस तरह के क्रिस्टल अधिक पाए जाते हैं उसी तरह की पथरी गुर्दे या मूत्राशय में पायी जाती है। पेशाब की जांच से गुर्दे में संक्रमण होने अथवा न होने का पता भी चल जाता है। पथरी यदि एक सेंटीमीटर तक ही बड़ी हो तो वह काफी हद तक पानी से निकल सकती है।
बड़ी पथरियों के मामले में ऑपरेशन ही एकमात्र उपाय है। पथरी छोटी हो या बड़ी, उसके निकलने से पूर्व कुछ खाद्य वस्तुओं का निषेध जरूरी है। पालक, बथुआ, सरसों का साग, टमाटर, मेथी, मूली, चौलाई के पत्ते, पत्तागोभी, सलाद, मूंगफली, सूखे मेवे, चाय, चॉकलेट, मछली, अंडा, दूध मांस, समुद्री खाद्य वस्तुएं, विटामिन डी की गोलियां और कैल्शियम वाले पदार्थ वर्जित हैं।
आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक दवाएं बड़ी पथरी निकाल पाने में नाकामयाब रही हैं। छोटी पथरी अधिक पानी पीने से वैसे ही निकल जाती है। आपरेशन के कई तरीके अब प्रचलन में हैं। प्राइवेट यूरोलॉजी में टोकरी जैसा ट्यूब मूत्र नली में डालकर पथरी खींच ली जाती है। लियोट्रिप्सी नामक तकनीक में तीन सेंटीमीटर तक की पथरी शॉक-वेव्स से तोड़कर चूरा कर दी जाती है। इसके अलावा दूरबीन विधि से मामूली सा छेदकर पथरी निकाल ली जाती है लेकिन यह दोनों ही तकनीक थोड़ी महंगी पड़ती हैं। चौथी तकनीक में थोड़ा पैसा कम लगता है पर चीरा बड़ा लगता है और काफी दिन दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। एक बार पथरी शरीर से बाहर निकल जाने के बाद बेफिक्र न हो जाएं कि अब पथरी का खतरा हमेशा के लिए खत्म। जिनके एक बार पथरी हो गई उनमें फिर पथरी बन जाने की पूरी संभावना है यदि खानपान में परहेज न किया तो। पथरी निकलवाने के बाद यह ध्यान रखना है कि पानी खूब पिएं, सर्दी के मौसम में लगभग 4 लीटर और गर्मियों में 5-6 लीटर। इसके अलावा पथरी बनाने वाले खाद्य पदार्थ अल्प मात्राा में सेवन करने होंगे। यदि सादा पानी अधिक पीना संभव न हो तो जूस और शर्बत आदि पी सकते हैं।
ऐसे लोगों को वर्ष में दो बार जांच करा लेनी भी ठीक रहती है क्योंकि अधिकतर लोगों को तब तक पथरी का पता नहीं चल पाता जब तक वह काफी बड़ी न हो जाए। पथरी का ऑपरेशन कराने से पूर्व एक नहीं कई अनुभवी डॉक्टरों और ऐसे लोगों से सलाह-मशविरा कर लेना चाहिए।

 
 

 

 

     
     
 
 
 

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