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   स्वास्थ्य
   आस्टियोपोरोसिस से करें बचाव
  हम में से बहुत सारे लोग अपनी त्वचा के बारे में चिंतित रहते हैं पर अपनी हड्डियों के बारे में नहीं सोचते। हमारे शरीर को चलाने में हड्डियों का महत्वपूर्ण योगदान है। हड्डियों से शरीर का ढांचा बनता है हमारे शरीर के आंतरिक अवयवों की सुरक्षा होती है। ये मांसपेशियों को सहारा देती हैं और कैल्शियम का भंडारण करती हैं।    
  जब हमारी हड्डियां अस्वस्थ हो जाती हैं और इनका द्घनत्व कम हो जाता है तब फ्रेक्चर का खतरा बढ़ जाता है। इसका डॉक्टरी नाम है अस्थियों का क्षरण यानी हड्डियों का भुरना (चूरा होना)। वैसे यह रोग उम्र बढ़ने के साथ होता है पर कभी कभी कुछ कारणों से यह रोग बचपन में भी हो जाता है।

वैसे इस रोग को छिपा चोर भी कहा जाता है क्योंकि हड्डियों में थोड़ी-थोड़ी कमी या हानि बिना लक्षणों के होती रहती है। इसका पता तब चलता है जब जरा सा धक्का लगने से, ढीले दरी कालीन में पैर फंस जाने से या जोर लगाकर कोई दरवाजा खिड़की खोलने से फ्रेक्चर हो जाता है।
कारण :-
शारीरिक श्रम न करने से।
पौष्टिक आहार की कमी से जैसे कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा नियमित भोजन में न लेने से।
मेटाबोलिज्म सिस्टम का ठीक न होना, जैसे कई बार इंसान को खाया खाना ठीक से पचता नहीं है। उनको दस्त और उल्टी की शिकायत रहती है।
महिलाओं में मेनोपाज़ भी एक प्रमुख कारण है, इसलिये संसार में तीन में से एक महिला आस्टियोपोरोसिस की शिकार है जबकि पांच में से एक पुरूष इसका शिकार है।
हार्मोन्स की गड़बड़ी
अधिक धूम्रपान करने वाले और शराब पीने वाले क्योंकि अल्कोहल भी हड्डियों को कमजोर करता है।
आमाशय में सूजन का होना, थायराइड या मिरगीग्रस्त रोगियों की हड्डियां भी कमजोर हो जाती हैं।
लाइफस्टाइल भी हड्डियों के क्षरण पर प्रभाव डालता है।
अस्थिक्षरण का खतरा कुछ हद तक आनुवांशिक कारणों पर भी निर्भर करता है किन्तु जीवनशैली ठीक रखकर खतरे को कम किया जा सकता है।

अस्थिक्षरण रोग से बचने के लिए हड्डियों का मजबूत होना आवश्यक है उसके लिए ध्यान दें कि क्या किया जाए ताकि हमारी हड्डियां स्ट्रांग बनी रहें।
कैल्शियम पर्याप्त मात्राा में लें। कैल्शियम दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों से मिलता है जैसे लस्सी, चीज, पनीर, दही, सोयाबीन, संतरे का जूस, मछली बादाम, हरी सब्जियां आदि। ध्यान दें दूध से बने खा़द्य पदार्थ स्किम मिल्क के हों। अधिक कैफीन और नमक भी हड्डियों को नुक्सान पहुंचाते है।
प्रोटीन की मात्रा भी पर्याप्त लें। सोयाबीन, बेसन, काले चने, राजमां, बीन्स प्रोटीन के भंडार हैं।
विटामिन डी आप धूप में कुछ समय बैठकर ले सकते हैं। धूप हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक है।
शारीरिक क्रियाओं की मात्रा बढ़ा कर भी हम इस रोग को रोक सकते हैं जैसे योगा, एरोबिक्स, सैर, कूदना, हाकी क्रिकेट, फुटबाल आदि,।
साफ्ट ड्रिक्स से परहेज करें।
अल्कोहल व धूम्रपान से परहेज करके।
आस्टियोपोरोसिस केवल बुढ़ापे का ही रोग नहीं है, यह रोग केवल महिलाओं का नही है यह रोग कभी भी किसी को हो सकता है इसलिए अपनी हड्डियों की मजबूती पर ध्यान दें।
कुछ दवाएं भी हड्डियों को कमजोर बनाती हैं। दवाओं का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें और डॉक्टर से भी पूछ लें कि लम्बे समय तक दवा सेवन करने से हड्डियों पर कोई प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।
आस्टिपोरोसिस की जांच बोन डेंसिटी टेस्ट से करवाई जा सकती है।

 

 
 

 

 

     
     
 
 
 

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