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पसीने में गंध का कारण
जब पसीना हमारी त्वचा के रोमकूपों से निकलता है तो उसमें कोई गंध नहीं होती
है। मूलतः पसीने के साथ नमक, प्रोटीन, यूरिया, वसा आदि निकलते हैं लेकिन जब
पसीने का वाष्पीकरण नहीं हो पाता तो त्वचा में मिले जीवाणु (बैक्टीरिया) इस
पसीने में मिले वसा व प्रोटीन से क्रिया कर के उन्हें अमल व अमोनिया में
परिवर्तित कर देते हैं। इसी कारण पसीने में तेज बदबू उत्पन्न होती है।
पसीना आने का कारण
मनुष्य की त्वचा के नीचे लगभग २० लाख स्वेद ग्रंथियां होती हैं। इन्ही
ग्रंथियों में पसीना बनता है। प्रत्येक ग्रन्थि में छोटी छोटी एवं बहुत ही
कोमल ट्यूब होती है जिस का मुंह त्वचा की भीतरी परत डर्मिस में थोड़ा उपर होते
हुए त्वचा की सतह पर आ कर खुलता है। इन ग्रंथियों द्वारा नमकयुक्त, साथ में
प्रोटीन व वसायुक्त पानी का रिसाव होता है। इन ग्रंथियों का काम शरीर के
तापमान को नियंत्रित करना होता है जो त्वचा की उपरी सतह पर नमी पैदा करते हुए
त्वचा में ठंडक उत्पन्न करता है।
जब नमी का वाष्पीकरण होता है तब हमें ठंडक का एहसास होता है। पसीना आना हमारे
स्वास्थ्य के लिये बहुत ही जरूरी है क्योंकि पसीने से हमारे शरीर का तापमान
नियंत्रित रहता है। जितनी ज्यादा गर्मी पड़ेगी उतना ज्यादा ही हमें पसीना आयेगा।
इसी पसीने के वाष्पीकरण से हमारी त्वचा को ठंडक मिलती रहती है और शरीर का
तापमान स्थिर रहता है।
दुर्गंध से बचने के उपाय
अधिकांश देखा गया है कि लोग २-४ द्घंटे वस्त्र पहनने के बाद फिर से उन्हें
अलमारी में ज्यों का त्यों रख देते हैं। यह आदत ही मुख्यतः दुर्गंध का कारण
बनती है क्योंकि पसीने से लथपथ भीगे वस्त्रों पर जीवाणु अति शीद्घ्र आक्रमण
कर पसीने में उपस्थित वसा, प्रोटीन एवं यूरिया से क्रिया करते हैं जिस के चलते
दुर्गंध उत्पन्न होती है। हमें यही कोशिश करनी चाहिए कि भले ही २ द्घंटे
वस्त्र पहनें लेकिन अलमारी में रखने से पहले उसे धोना कभी न भूलें।
इसके साथ ही हमें अपने शरीर की सफाई पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहरी
जीवाणुओं का आक्रमण न हो, इसके लिऐ हमें गर्मियों में, खासकर दिन में दो बार
स्नान करना चाहिए। नहाने में साबुन का प्रयोग अवश्य करें। अगर साबुन
डिटोलयुक्त या नीमयुक्त हो तो अति उत्तम। अगर आपके पसीने में अधिक दुर्गंध हो
तो नहाने के बाद पानी में थोड़ा सा सफेद सिरका डाल कर उस सिरकेयुक्त पानी से
नहायें। ऐसा करने से आपकी त्वचा पर अम्ल का असर रहेगा जिससे जीवाणु आपके शरीर
से निकलने वाले पसीने की ओर आकर्षित नहीं होंगे।
नहाने के बाद टेलकम पाउडर का प्रयोग करें। इससे आपके शरीर में स्फूर्ति तो बनी
ही रहेगी और ज्यादा पसीना आने पर पाउडर उसे सोखता भी रहेगा। जहां तक हो सके,
स्टार्चयुक्त पाउडर का प्रयोग करना उतना ठीक नहीं रहेगा क्योंकि इस पाउडर में
मिला स्टार्च पसीने के साथ मिल कर चिपचिपाहट उत्पन्न कर सकता है।
एंटीपरस्पायरेंट एवं डिओडोरेंट का प्रयोग
आजकल बाजार में ऐसी बहुत सी चीजें मिलती हैं जिससे पसीने की दुर्गंध से निजात
पाई जा सकती है। इनमें प्रमुख है डिओडोरेंट जो पसीने की दुर्गंध को रोकता है,
एवम् एटीपरस्पायरेंट जो पसीना रोकता है। डिओडोरेंट में ऐसे तत्व होते हैं जो
जीवाणुओं को खत्म तो नहीं करते परंतु उनकी बढ़ोतरी को अवश्य नियंत्रित करते
हैं। इस के अलावा डिओडोरेंट खुशबूदार होता है जो पसीने की दुर्गंध को दबा देता
है। डिओडोरेंट नहाने के तुरंत बाद प्रयोग करना चाहिए। वैसे तो डिओडोरेंट आजकल
साबुन के रूप में भी बाजार में उपलब्ध है।
एंटीपरस्पायरेंट न सिर्फ त्वचा की सतह पर पसीने को जमा होने से रोकता है अपितु
पसीने में मिले जीवाणुओं का नाश भी करता है लेकिन एंटीपरस्पायरेंट को प्रयोग
करने से पहले इस की जांच कर लें क्योंकि इससे एलर्जी भी हो सकती है। हो सकता
है यह आपकी त्वचा के अनुरूप न हो।
एंटीपरस्पायरेंट का प्रयोग हमेशा स्नान करने के २०-२५ मिनट बाद ही करना चाहिए।
इसे लगाने से पहले अपने शरीर को तौलिये से रगड़ कर भली भांति सुखा लेना चाहिए।
अगर आपके पसीने में अधिक बदबू है तो आप इसे दिन में २ बार प्रयोग कर सकते हैं
लेकिन इस्तेमाल करने से पहले स्नान करना और शरीर का सूखा होना अति आवश्यक है।
इन सब चीजों के अलावा आजकल बाजार में यूडीकोलोन बड़ी आसानी से मिल जाता है। बस
इसे नहाने के पानी में कुछ बूंदें डाल कर नहायें। नहाने के तुरंत बाद ही आपका
बदन महकने लगेगा और तरो ताजगी महसूस होने लगेगी सो अलग। इन सब उपायों के बाद
भी आपके पसीने में थोड़ी बहुत दुर्गंध रहती है तो फिर परफ्यूम का प्रयोग करने
में हिचकिचायें नहीं।
धूप से बचें
जहां तक हो सके, गर्मियों के दिनों में कड़ी धूप से बचना चाहिए लेकिन कामकाजी
पुरूष एवं महिलाओं के लिये यह एकदम नामुमकिन है। फिर भी हम धूप से बचने के
लिये छतरी का प्रयोग कर सकते हैं। इसलिए धूप में जब भी निकलें तो छतरी का
प्रयोग अवश्य करें। इस से न तो धूप की किरणें आप के शरीर को स्पर्श कर पाएंगी
और न ही अधिक पसीना आएगा। धूूप में उपस्थित पराबैंगनी किरणों का प्रभाव त्वचा
पर कैंसर जैसी बीमारी भी उत्पन्न कर सकता है।
खानपान
गर्मियों के दिनों में हमें खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जहां तक हो सके
ऐसे आहार लें जो शरीर को ठंडक पहुचाएं जैसे मौसमी, फलों का रस, दही, सलाद आदि
का प्रयोग अधिक करें। तली भुनी चीजें एवम् मिर्च मसालायुक्त भोजन कम खायें।
पसीने के साथ शरीर में नमक भी निकलता है इसलिए पानी में नींबू व नमक डाल कर
पियें। इससे शरीर में नमक का संतुलन बना रहेगा। गर्मियों के दिनों में हमें
कम से कम १०-१२ गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।
पहनावा
गर्मियों के दिनों में हमें अपने पहनावे व वेषभूषा पर भी विशेष ध्यान देना
चाहिए। शरीर से चिपके हुए तंग कपड़े हमें नहीं पहनने चाहिए। तंग कपड़ों में
पसीना अधिक आता है एवं पसीने का वाष्पीकरण सही ढंग से नहीं हो पाता जिसके चलते
कपड़ों से दुर्गंध आने लगती है। इसलिए गरमी के दिनों में ढीले व साफ सुथरे सूती
कपड़े पहनें। जहां तक हो सके, सिंथेटिक कपड़े न पहनें क्योंकि सिंथेटिक कपड़ों
में शरीर तक हवा एकदम नहीं पहुंच पाती एवम् शरीर गरम होने लगता है जिसके चलते
पसीना अधिक निकलने लगता है।
अगर आप इन सब छोटी-छोटी बातों का ध्यान गरमियों के दिनों में रखेंगे तो आप
आसानी से पसीने से निजात पा सकते हैं।
-नवतेज सिंह खड़तोल |