| स्वास्थ्य | ||||
| डाक्टर से बचने के उपाय | ||||
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वन संयमित एवं नियम अनुसार चले, तभी हम स्वस्थ रह
सकते हैं अन्यथा बीमार होकर और नकली दवाइयां खा कर ज्यादा बीमार पड़ सकते हैं।
कुछ प्राकृतिक स्वास्थ्य निर्देशों का पालन करें तो यथा संभव बीमारी एवं
डॉक्टर से बचा जा सकता है। भोजन के साथ जल ना पिएं। आधे घण्टे बाद पिएं। भोजन के साथ पानी पीने से पाचक रस काम नहीं करते। |
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मूत्र त्याग के पश्चात पानी पीने से शरीर की
कोशिकाओं में जल की कमी नहीं होती। पेचिश व मरोड़ में बार-बार शर्बत, नींबू पानी, जूस, दाल व सूप पिएं। शरीर की धातुएं संतुलित रहेंगी। नशे वाली वस्तुओं से यथा सम्भव बच कर रहें। थोड़ा जहर भी अमृत है। ज्यादा अमृत भी जहर बन सकता है। मिर्च मसाले, लाल मिर्च, अचार, ज्यादा नमक, चीनी, द्घी, मैदा से बचें। ये शरीर को ज्यादा लाभ नहीं देते। |
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कोशिश करें कि मौसमी फल व सब्जियां ज्यादा खायें।
इनसे विटामिन, एंजाइम और खनिज मिलते हैं। सप्ताह में एक उपवास करें या जब भूख लगे, तब खाएं। भूख न हो तो जबरदस्ती ना खाएं। जब भी खाएं, पौष्टिक पदार्थ खाएं। अखाद्य पदार्थ ना खाएं क्योंकि आप शरीर की कोशिकाओं का पोषण कर रहे है जो हमें जीवित रखती हैं। गुस्से एवं शोक में भोजन ना खाएं। जल्दी-जल्दी भोजन न खाएं। प्रातः चार कि. मी. सैर अवश्य करें। आदत डालें। प्रातः कालीन चाय छोड़ने का प्रयत्न करें। सब्जियों को छिलके सहित धोकर बनाएं। यथा संभव फल भी छिलके सहित खाएं। आटा चोकर सहित एवं अनाज अंकुरित करके, दालें साबुत एवं अंकुरित करके खाएं। इससे इनके पोषक तत्वों में वृद्धि हो जाती है। दिन में तीन बार चार द्घण्टे के पश्चात खाएं क्योंकि 4 द्घण्टे में पेट खाली हो जाता है। हरी सब्जियां व सलाद ज्यादा लें। अन्न कम खाएं। भोजन चबा कर खाएं। बासी भोजन ना खाएं। भोजन उतना ही बनाएं जितने से पूर्ति हो जाए। चना, गुड़, आलू, केला व शक्कर भोजन में अवश्य खायें। प्राकृतिक रंगों वाली सब्जियां व फल खाएं। प्राकृतिक रंग रोगों से मुक्त करते हैं। द्घर साफ, हवादार व रोशनीयुक्त हो। सूर्य किरणों से विटामिन डी लें। भोजन मिट्टी के बर्तनों और लोहे के बर्तनों में बनाएं जो लगभग अब किसी द्घर में नहीं होते। किसी समय लोग मिट्टी के बर्तन में साग, दूध गर्म करते थे। हलवाई के पास लोहे की बड़ी कड़ाही में से लोग दूध पिया करते थे जो अब लगभग बंद हो गया है। द्घर में लोहे की कड़ाई में सूखी सब्जी बनायें। लस्सी, दही एवं फल सब्जियों का रस व गाजर का रस ज्यादा प्रयोग करें और तन्दुरूस्त रहें। प्रकृति ने हमें 100 वर्ष का जीवन दिया है। हम अपनी नादानियों से इसे कम करते जा रहे हैं। नियमपूर्वक चलने से हम दीर्द्घायु प्राप्त कर सकते हैं। |
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