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   स्वास्थ्य
   चिकित्सक के सलाह पर ही लें कामबर्द्धक दवाएं
 

'दांपत्य' जीवन का आधार 'सफल सहवास' को ही माना जाता है। प्रत्येक पति-पत्नी की यही इच्छा रहती है कि उसका साथी उसे भरपूर शारीरिक सुख प्रदान करे। अनेक बार समाचारों से ज्ञात होता है कि शारीरिक सुख के अभाव में पति ने पत्नी से या पत्नी ने पति से तलाक तक ले लिया। वास्तविकता भी यही है कि प्रत्येक पति या पत्नी अपने लाइफ पार्टनर से यही उम्मीद रखते हैं कि उन्हें अन्य सुखों के साथ ही शारीरिक सुख की प्राप्ति भी भरपूर हो।

   
 

वर्तमान समय में खानपान की अनियमितता, रहन-सहन के तौर-तरीकों में बदलाव, सौन्दर्य प्रसाधनों का भरपूर प्रयोग, कामुक दृश्यों को देखना या उससे संबंधित अश्लील साहित्यों को पढ़ना, अधिक उम्र में शादी, कुसंगतियों का प्रभाव, व्यस्त दिनचर्या, मानसिक तनाव आदि अनेक ऐसे कारण हैं जिनके कारण पुरूष की सहवास कालीन उत्तेजना शिथिल हो जाती है।

इसी प्रकार औरत भी उपरोक्त कारणों से ग्रस्त होकर सहवास कालीन उचित सहयोग पुरूष का नहीं कर पाती। यही अभाव धीरे-धीरे सुखद दांपत्य जीवन के बीच बिखराव रूपी दरारें उत्पन्न करने लगता है और एक समय ऐसा भी आता है जब पति-पत्नी का दांपत्य संबंध टूट कर बिखर जाता है।
प्रायः पत्र-पत्रिकाओं में अनेक कामशक्तिवर्द्धक औषधियों का विज्ञापन छपते ही रहते हैं। उनका कामशक्ति पर कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, वह तो प्रयोग करने वाले ही बता सकते हैं किन्तु यह सच है कि इनका प्रयोग चिकित्सक के परामर्श के बगैर नहीं करना चाहिए। कौन-सी औषधि आपके शारीरिक बनावट या बलानुसार सही साबित होगी, इसका परामर्श चिकित्सक से लेकर ही औषधि का सेवन करना हितकर होता है।
विज्ञापनों के आधार पर ही औषधि खरीद कर सेवन करना स्वास्थ्य के प्रतिकूल भी हो सकता है। उम्र, शारीरिक शक्ति, कद-काठी, वातावरण, मौसम आदि के आधार पर भी औषधियों का चयन, खुराक, अनुपान आदि निर्भर करता है। इसलिए यह आवश्यक हो जाता है कि चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद ही कामशक्तिवर्द्धक औषधियों का सेवन किया जाएं।सही खानपान, उचित व्यायाम, एकान्त वातावरण, तनाव मुक्त होना आदि अनेक ऐसी बातें हैं जो पति पत्नी के बीच सहवास का सफल कारण बनती हैं। पति-पत्नी के बीच सौहार्द की भावना, कामकला का नैसर्गिक ज्ञान, सहवास का उचित समय तथा उचित स्थान भी सफल सहवास में सहायक बनता है। चटपटी वस्तुओं का अधिक सेवन, फुटपाथी चीजों को खाने की आदतें भी कामशक्ति का हृास करती हैं।
पेटेन्ट औषधियों के सेवन काल में पौष्टिक एवं सुपाच्य भोजन भी नियमित रूप से लेना आवश्यक है। औषधियों का सेवन करके क्षणिक उत्तेजना को तो बढ़ाया जा सकता है किन्तु स्थायित्व को प्राप्त नहीं किया जा सकता। पत्नी के साथ सहवास काल में स्थायी कामशक्ति ही कामयाब होती है। अतएव किसी भी औषधि के सेवन काल में सिर्फ औषधि पर ही निर्भर न रहकर उसके साथ पौष्टिक खान-पान तथा तनाव को दूर करने का भी प्रयत्न करना चाहिए अन्यथा अच्छी से अच्छी औषधि से भी लाभ नहीं उठाया जा सकता।
जब भी आप किसी कामशक्तिवर्द्धक औषधि का प्रयोग करना चाहें, फलों के जूस का पान अवश्य ही करें। सूखे मेवों का प्रयोग भी इन औषधियों के सेवन काल में अवश्य ही करना चाहिए। ऐसा करते रहने से सहवास की संतुष्टि स्थायी बनी रहती है। औषधि कोई भी खराब नहीं होती किन्तु उससे सम्पूर्ण लाभ लेने के लिए चिकित्सकीय परामर्श के साथ ही पथ्य-अपथ्य पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है। इसीलिए लज्जा त्यागकर चिकित्सक को अपनी तथा पत्नी की शारीरिक कमजोरियों को सही-सही बताकर उनके परामर्श से ली गई औषधि का ही सेवन करना चाहिए। औषधि सेवन काल के पथ्य-अपथ्य की सही जानकारी भी प्रापत कर लेनी चाहिए।

 

 
 

 

 

     
     
 
 
 

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