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संपादकीय |
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''जैसे जीवन है एक पहेली, |
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निःसन्देह जब नारी के रूप अनेक हैं तो उसके सामने
इन रूपों से जुड़ी चुनौतियां भी अनेक तथा भिन्न-भिन्न प्रकार की हैं। भाग-दौड़
भरे जीवन और समय के अभाव के कारण जीवन के कुछ पहलू रह जाते हैं अनछुए, अनसमझे
जो जीवन में लाते हैं नीरसता। इसी तथ्य को अनुभव करते हुए हमने आपके लिए
तैयार की है एक खास पत्रिका 'गृहसहेली' इसे पाएगी आप गागर मे सागर के समान।
E-mail : rajeevdhingra@grehsaheli.com
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