| |
आज के समय में पति पत्नी-पत्नी के बीच प्रायः तनाव
चलता रहता है। तनाव के कारण दाम्पत्य संबंधों में भी नीरसत्ता आने लगती है।
कभी-कभी तो ऐसा लगता कि पति पत्नी का मधुर सम्बन्ध ही धराशायी हो जाएगा। पत्नी
का मायके चला जाना, तलाक की नौबत तक तनावयुक्त सम्बन्धों के कारण आ जाया करती
है।
फेंग शुई के उपायों के जरिये पति-पत्नी के बीच के तनावों को कम किया जा सकता
है। इतना ही नहीं प्रेमी-प्रेमिका के सम्बन्धों को भी बेहतर बनाने में
फेंगशुई की अहम् भूमिका मानी जा रही है। यहां कुछ ऐसे ही फेंगशुई के टिप्स
प्रस्तुत हैं जिनके माध्यम टूटते रिश्तों को जोड़कर मजबूत बनाया जा सकता है-
फेंगशुई के अनुसार दक्षिण-पश्चिम नैत्य दिशा, विवाह, प्रेम एवं आपसी संबंधों
की दिशा है। अतः सुखद दाम्पत्य के लिए शयनकक्ष की इस दशा को ऊर्जामय बनाने के
लिये शयनकक्ष में पूर्णिमा की रात को लाल या पीली मोमबत्तियां लालटेन अथवा
लैम्प जलाने से द्घर में फेंगशुई की येंग ऊर्जा का उदय होता है जो प्रेम और
शांति का प्रतीक है।
पति-पत्नी को अपने प्रेम एवं रोमांस को स्थायी बनाने को अपने तथा जिन्हें
मनचाहा जीवन साथी न मिल रहा हो उन्हें इसकी शीद्घ्र प्राप्ति के लिए इस उपाय
को करना चाहिए। एक चौड़ी गहरी प्याली में पानी भरकर इस प्याली में दीप के आकार
की चार पांच लाल या पीली मोमबत्तियां जलाकर तैरने के लिए छोड़ दें। इस प्याली
में कोई भी सात रत्न, लड़की का एक छोटा टुकड़ा, गुलाब, गेंदा या चमेली का एक
फूल तथा अपनी सोने या चांदी की अंगूठी अथवा इसी धातु का एक छोटा टुकड़ा डाल
दें।
इस प्याली को बैठक की मेज पर रख दें। यह प्याली ब्रह्माण्ड के पांच तत्वों का
प्रतिनिधित्व करती है। इसमें जलती हुई मोमबत्तियां अग्नि तत्व का रत्न पृथ्वी
का पानी जल तत्व का सोना चांदी धातु का तथा लकड़ी का टुकड़ा काष्ठ तत्व का
प्रतिनिधित्व करता है। इससे आपसी प्रेम की वृ(ि होती है तथा एक माह तक लगातार
कुंवारे लड़के के द्घर में रखने से मन पसन्द दुल्हन तथा। कुंवारी कन्या के
बेडरूम में डेढ़ महीने तक लगातार रखने पर मनपसन्द दूल्हें की प्राप्ति होती
है।
दाम्पत्य संबंधों में प्रसन्नता पाने के लिए यह आवश्यक है कि पलंग का स्थान
भी दरवाजे के ठीक सामने न हो। सोने वाले वाले के सिर या पैर द्वार की तरफ होने
से पत्नी कभी भी संतुष्ट नहीं होती है और दाम्पत्य संबंध में धीरे-धीरे दरार
उत्पन्न होने लगती है।
शयनकक्ष में टी.वी. या कम्प्यूटर को रखने से दाम्पत्य जीवन में भी अरुचि
उत्पन्न होती है इसलिए शयनकक्ष में इन वस्तुओं को नहीं रखना चाहिए। अगर इन
उपकरणों को शयनकक्ष में रखना अत्यन्त ही आवश्यक हो तो इन उपकरणों को प्रयोग
करने के बाद किसी मोटे कपड़े से ढक देना चाहिए।
फेंगशुई में क्रिस्टल अथवा स्फटिक को सकारात्मक ऊर्जा का अच्छा स्रोत कहा जाता
है। क्रिस्टल में विभिन्ना कट होने से यह सम्पूर्ण कमरे में सकारात्मक ऊर्जा
की किरणों को बिखेर देता हैं क्रिस्टल को शयनकक्ष में उत्तर-पश्चिम दिशा में
लगाने से पति-पत्नी यौन सम्बन्धों में दृढ़ता आती है तथा उनके मन में इसके
प्रति ललक भी लगती है।
शयनकक्ष में दर्पण लगाना अगर आवश्यक हो तो उसे पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख की
ओर ही लगाना चाहिए। यह फेंगशुई की शुभ तरंगों को परावर्तित करके द्घर में
सुख-शान्ति को बनाए रखता है। कक्ष में अगर गोल दर्पण लगा हो तो इस बात का
ध्यान रखना चाहिए कि पलंग का प्रतिबिम्ब उस दर्पण में न दिखाई पड़े। अगर ऐसा
हो रहा हो तो सोते समय दर्पण को कपड़े से ढक देना चाहिए।
कुंवारी कन्या के शयन कक्ष की उत्तर दिशा में भालू या हिरण की मिट्टी की
पूर्ति रखने से मनपसन्द दूल्हें की प्राप्ति होती है। अगर कोई प्रेमी रूठ गया
हो तो उसका नाम लिखकर एक वस्त्र में पांच कौड़ी बांधकर एक माह तक सिरहाने रखकर
सोने से प्रेमी फिर से प्रेम करने लगता है। कौड़ी बांधे जाने वाले वस्त्र
प्रेमिका का उपयोग किया जाने वाला वस्त्र ही होना चाहिए। फेंगशुई के चमत्कार
को आजमाने पर ही उससे लाभ पाया जा सकता है।
-आनन्द कुमार |
|
|