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  फैशन
  व्यक्तिव को उभारता है हैंड बैग
 

मौजूदा दौर में हैंडबैग और पर्स आधुनिक महिलाओं का आवश्यक साथी बन चुका है। किसी के हैंडबैग को खोलते समय ही उसकी स्वामिनी के स्वभाव के विषय में पता लगाया जा सकता हैं। वैसे तो बाजार में जूट, कपड़े, रेक्सिन व चमड़े के मनभावन डिजाइनों के विविध पर्स व हैंडबैग मिलते हैं। हैंडबैग व पर्स का रंग व आकार यदि जूतों, कद काठी व वस्त्रों से मेल खाता हुआ हो तो ये व्यक्तित्व की शोभा द्विगुणित कर देते हैं।

   

 आम तौर पर सफेद, काले मैरून भरे सिल्वर व सुनहरी हैंडबैंग लगभग सभी पोषकों से मैच कर जाते हैं।
अवसर के मुताबिक औपचारिक समारोह में जाते समय या खरीदारी करते समय और नौकरी पर जाते समय आवश्यकतानुसार चीजें भरकर अलग-अलग हैंडबैंग का प्रयोग करना चाहिए।
कॉलेज व ऑफिस जाने वाली युवतियों को खुशनुमा आधुनिक डिजाइन के जूट, कपड़े, रेक्सिन या चमड़े के कमर तक लटकने वाले हैंडबैंग काम में लाने चाहिएं।
अध्यापन व प्रशासनिक दायित्वों से जुड़ी महिलाओं को सिम्पल डिजाइन का एकरंगा हैंडबैग व पर्स लेना चाहिए। दुबली, पतली छोटे कद की महिलाओं को चौड़े स्टै्रप वाले बड़े आकार के चपटे हैंडबैग का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इन पर हल्के-फुल्के स्टे्रप वाले गोलाकार या पंचकोणनुमा शेप के हैंडबैग खूब फबते हैं।
नाटी व मोटी महिलाओं को भी बहुत बड़े या छोटे हैंडबैग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इन्हें कमर से लटकने वाले हैंडबैंग की बजाय हैण्डिल वाले मध्यम आकार के हैंडबैग काम में लेने चाहिएं।
लम्बे कद की महिलाओं पर थोड़े बड़े लटकने वाले हैंडबैंग फबते हैं। शादी व स्वागत समारोह जैसे मांगलिक अवसरों पर पोषाक से मेल खाते मखमल या शनील के पर्स बहुत अच्छे लगते हैं।
इसके अतिरिक्त सुनहरी रंग के या क्रोषिये से बुने मैचिंग पर्स भी बखूबी व्यक्तित्व की छटा में चार चांद लगाते हैं।
चमचमाते साफ सुथरे हैंडबैग जहां सुरूचिपूर्ण व्यक्तित्व के परिचायक हैं, वहीं बेडौल शेप के उखड़ी जिप वाले, बेकार सामान से भरे हैंडबैग फूहड़ व्यक्तित्व की चुगली खाते नजर आते हैं। इससे बचने हेतु अनावश्यक चीजें हैंडबैग में न रखें। इससे जिप व तनियों ;स्टे्रपसद्ध पर अनावश्यक बोझ पड़ता है और वे जल्दी खराब हो जाते हैं। फालतू चीजें भरी रहने से चीजें भी तुरंत मिल नहीं पाती।
बरसात के दिनों में चमड़े व हैंडबैग व पर्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि पानी की नमी से ये बेडौल हो जाते हैं और इनमें फफूंद लग जाती है।
हैंडबैग व पर्स का इस्तेमाल करने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर रख देना चाहिए। अधिक समय तक जब पर्स का प्रयोग न करना हो तो उसमें कागज भर कर रखें ताकि आकार ठीक बना रहे। इन्हें बच्चों व फालतू जानवरों को खेलने के लिये देना नहीं चाहिए क्योंकि इससे इनके खराब होने का डर बना रहता है।
--श्रीमती सरल जैन
 

 
 

 

 

     
     
 
 
 

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