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यकीनन रिया अपनी मम्मी मुनमुन की तरह बेहद खूबसूरत और सैक्सी हैं। निर्माता
कैलाश सुरेन्द्रनाथ ने सबसे पहले रिया सेन को अक्षय खन्ना के अपोजिट 'लव यू
हमेशा' के लिए साइन किया था लेकिन वह फिल्म मुहूर्त से आगे नहीं बढ़ सकी।
रिया सेन की पहली फिल्म 'स्टाइल' २००१
में प्रदर्शित हुई। उसके बाद अब तक वे 'झंकार बीट्स', 'अपना सपना मनी मनी', 'शादी
नंबर १', 'प्लान', 'कयामत' और 'दिल विल प्यार व्यार' जैसी फिल्मों में अपने
जलवे बिखेर चुकी हैं। उनके अभिनय में निरंतर निखार और परिपक्वता दिखाई दे रही
है।
उनकी
एक्टिंग शैली में जहां उनकी मां मुनमुन की खूबसूरती मौजूद है तो नानी सुचित्रा
सेन की संजीदगी भी नजर आती है। फिल्मों में आने से पहले रिया ने बाकायदा
कत्थक सीखा है। वह हिंदी फिल्मों के साथ ही साथ बंगाली और तमिल फिल्मों में
बराबर सक्रिय हैं। जिन फिल्मों में उन्होंने हास्य किरदार निभाये, उन्हें
ज्यादा पसंद किया गया।
यहां प्रस्तुत हैं 'जोर लगा के हैया' की शूटिंग के दौरान रिया सेन के साथ की
गई बातचीत के मुख्य अंश :-
आपकी
इमेज एक सैक्सी और ग्लैमरस एक्टे्रस की रही है। निर्देशक गिरीश जोशी की फिल्म
'जोर लगा के हैया' में आप पहली बार एक ऐसी मराठी भाषी लड़की का रोल कर रही हैं
जो नौ वारी महाराष्ट्रियन साड़ी पहनकर निर्माणाधीन भवन पर ईंट व गारा ढोने का
काम करती है। आखिर आप इस भूमिका के लिए तैयार किस तरह हो गईं ?
यह एक हास्य पर आधारित फिल्म हैं और दैनिक समस्याओं को रूबरू कराने वाली
फिल्म साबित होगी। जब मुझे इस फिल्म का ऑफर मिला, तब मुझे भी एक बार लगा कि
क्या मैं इस फिल्म में अपने किरदार के साथ न्याय कर सकूंगी लेकिन पिफल्म के
निर्माता कार्तिकेय तलरेजा ने मुझे पूरी तरह कनविंस किया। हालांकि फिल्म के
लिए मुझे दूसरी फिल्मों के मुकाबले ज्यादा मेहनत करनी होगी लेकिन मुझे यकीन
है कि मैं अपने काम को सही तरीके से कर सकूंगी।
'तारा सितारा' भी एक कॉमेडी फिल्म है। अब
तक प्रदर्शित आपकी फिल्मों में ज्यादातर कॉमेडी फिल्में ही रही हैं। कुछ
फिल्मों में आपने ग्लैमरस रोल निभाये लेकिन अभी तक आपके हिस्से में सीरियस
रोल नहीं आये। क्या सीरियस रोल्स वाली फिल्मों के लिए आप पूरी तरह फिट हैं?
हां, यह बिलकुल सच है कि 'टाइल', 'अपना सपना मनी मनी', 'शादी नंबर १' और 'झंकार
बीट्स' जैसी फिल्मों में मेरे कॉमिक रोल थे लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मैं
सीरियस फिल्मों में काम नहीं कर सकती या इस तरह की फिल्मों के लिए फिट नहीं
हूं। मैं हर तरह की फिल्म कर सकती हूं लेकिन मुझ पर ग्लैमरस रोल ज्यादा सूट
करते हैं। जिन फिल्मों में मैंने कॉमेडी की, उनमें भी मैं ग्लैमरस अंदाज में
ही नजर आती हूं हालांकि मैं ग्लैमरस और नॉन ग्लैमरस दोनों तरह के रोल बड़ी
आसानी के साथ कर सकती हूं।
आपकी खूबसूरती और ग्लैमर को देखते हुए ऐसा लगता
है कि आपको फिल्मों में पर्याप्त कामयाबी नहीं मिली। सात आठ साल लंबे कैरियर
में एक दर्जन से भी कम फिल्में। क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि दूसरी एक्टे्रसों
के मुकाबले आज भी आपके पास काम की बेहद कमी है?
मैं मानती हूं कि सात साल में मैंने सिर्फ सात-आठ फिल्में की हैं, जो बहुत कम
हैं लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मेरे पास ऑफर नहीं आ रहे। मेरे पास ऑफर्स की
आज भी कोई कमी नहीं है लेकिन मैं खुद ही कम से कम काम कर रही हूं क्योंकि मैं
सिर्फ ऐसी फिल्में करना चाहती हूं जिनमें कुछ कर दिखाने के अवसर ज्यादा हों।
मेरी अब तक प्रदर्शित फिल्मों में चार सुपर हिट रही हैं। यही मेरी उपलब्धि है
और मेरे लिए यह काफी है। मैं नहीं मानती कि मुझे जितनी कामयाबी मिलनी चाहिए
थी, उतनी नहीं मिली। मेरी कम फिल्में अवश्य हैं, लेकिन मुझे कामयाबी भरपूर
मिली है।
एक बार यदि कोई एक्टे्रस हिंदी फिल्मों में अपने
लिए मुकाम बना ले, तब वह प्रादेशिक फिल्में करना करीब करीब बंद कर देती है
लेकिन आप हैं कि आपका झुकाव आज भी हिंदी फिल्मों की तुलना में बंगाली और तमिल
फिल्मों में ज्यादा नजर आता है?
हां, यह सच है कि मैंने हिन्दी फिल्मों की तुलना में बंगला फिल्में ज्यादा की
हैं और इसका एक सबसे बड़ा कारण यह है कि मैं कलकत्ता में ही रहती हूं। मुंबई
तो कभी-कभी आती-जाती हूं। मैं अपनी बात करती हूं, मुझे हिंदी पिफल्मों की
तुलना में बंगला फिल्में करना ज्यादा अच्छा लगता है। इन दिनों में रितुपर्णो
द्घोष के साथ एक और बंगाली फिल्म कर रही हूं जिसमें मेरा एकदम सीरियस रोल है।
यह फिल्म देखकर दर्शकों की यह शिकायत पूरी तरह दूर हो जायेगी कि मैं सीरियस
रोल नहीं कर सकती। हिंदी फिल्मों में भी मुझे अपनी पहली सीरियस फिल्म का
इंतजार है।
अभी आप यशराज बैनर और करन जौहर की फिल्मों से
काफी दूर हैं। आपको ऐसा नहीं लगता कि इन मेकर्स की फिल्में एक बार हासिल कर
लें तो आपके भी वारे-न्यारे हो सकते हैं?
हां, क्यों नहीं, यशराज और करन जौहर इंडस्ट्री के बड़े मेकर्स हैं। यदि मैं यह
कहूं कि उनके साथ काम करने के लिए मैं किसी तरह की दिलचस्पी नहीं रखती तो साफ
पता चल जायेगा कि मैं झूठ बोल रही हूं। यकीनन दूसरी लड़कियों की तरह मैं भी
उनके साथ काम करने के लिए मरी जा रही हूं लेकिन यह उन्हें भी तो सोचना चाहिए
कि वे मेरे साथ काम करना चाहते हैं या नहीं। अकेले मेरे चाहने से भला क्या हो
सकता है।
-सुभाष शिरढोनकर |